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खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने का सबसे आसान आयुर्वेदिक तरीका

How to increase blood hemoglobin level by Ayurveda?

खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने का सबसे आसान आयुर्वेदिक तरीका

नमस्कार मित्रों।

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में संतुलित और पोषक आहार बहुत जरूरी है। यह बात हम सभी जानते हैं फिर भी अपना नही पाते। जिसके कारण हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।

आमतौर पर आप सभी ने हीमोग्लोबिन के बारे में सुना होगा। यह रक्त में मौजूद लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला तत्व है जो कि लौह और प्रोटीन के संयोग से बना होता है। यह ऑक्सीजन को रक्त के माध्यम से शरीर के सभी कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करता है। जिससे कोशिकाएं अपने अपने कार्य सुचारू रूप से कर पाते हैं।

जब हम अनजाने में अपने आहार में आयरन और प्रोटीन की अवहेलना करने लग जाते हैं तो हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है। इसके अलावा मलेरिया, टाइफाइड, कैंसर में रेडियोथेरेपी की वजह से, अन्य जीर्ण/ पुराने रोग, बवासीर में अधिक खून जाना, महिलाओं में माहवारी के समय अधिक रक्तस्राव होना, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होना, चोट लग जाने पर अधिक खून बह जाना आदि भी हीमोग्लोबिन की कमी हो जाने के कारण हो सकते हैं।

खून में हीमोग्लोबिन की कमी को कैसे बढ़ाया जा सकता है?
(How to increase blood hemoglobin level?)

किसी भी रोग के समाधान के लिए सबसे जरूरी है कि कारण का पता लगाया जाए। कारण ज्ञात हो जाने पर समाधान करना आसान हो जाता है। जिस रोग की वजह से हीमोग्लोबिन में कमी आई है उस रोग की चिकित्सा के साथ ही रक्तवर्धक पोषक आहार एवं औषधियों के सेवन से इस कमी को दूर किया जा सकता है।

हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले आहार एवं औषधियां:

रक्त में हीमीग्लोबिन की कमी दूर करने के लिए आयरन रिच फूड्स बहुत जरूरी होते हैं। गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां जिसे हम सामान्य रूप से भाजी या साग भी कहते हैं, जैसे कि पालक, मेथी, बथुआ आदि का प्रयोग अच्छा होता है। फलीदार सब्जियां एवं दालों में भी आयरन एवं प्रोटीन पाया जाता है जिसका सेवन करना हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए अच्छा होता है। विटामिन बी-9 (फोलिक एसिड) युक्त आहार का सेवन भी हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए उचित पाया गया है। विटामिन बी-9 से भरपूर भोज्य पदार्थों में गेंहू, बाजरा, ज्वार आदि अनाज आते हैं। इनकी बनी रोटियों का सेवन फायदेमंद है। इसके अलावा चना, मटर, सूखे फल एवं मेवे जैसे काजू, बादाम, छुहारे, खजूर, किसमिस, अंजीर, दाख आदि में प्रचुर मात्रा में विटामिन्स एवं खनिज पदार्थ पाए जाते हैं जो रक्त में हीमोग्लोबिन एवं लाल रक्त कणों को बढ़ाने में मदद करते हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान में यह पाया गया है कि 8 प्रकार के पोषक तत्वों से युक्त भोजन का सेवन करने से लाल रक्त कोशिकाएं एवं हीमोग्लोबिन में विशेष रूप से बढ़ोत्तरी होती है। ये पोषक तत्व हैं- आयरन (लौह), विटामिन सी, कॉपर (ताँबा), विटामिन ए, विटामिन बी 12, विटामिन बी 9, विटामिन बी 6 एवं विटामिन ई।

आयुर्वेद में भी उपर्युक्त आहार एवं भोज्य पदार्थों को रक्त वर्धक माना गया है। इसके अलावा कुछ औषधीय द्रव्य जैसे पुनर्नवा, गिलोय, हरिद्रा, दारुहरिद्रा, आमलकी, अर्जुन, सारिवा, खदिर, मंजिष्ठा, तालमूली, नागकेशर, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, मंडूर भस्म इत्यादि को रक्तवर्धक एवं रक्त प्रसादन कहा गया है। धात्री लौह, नावयस लौह, पुनर्नवादि मंडूर, लोहासव, पुनर्नवासव आदि अनेक आयुर्वेदीय शास्त्रीय योग भी हैं जो हीमोग्लोबिन एवं लालरक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मददगार साबित हुए हैं। इनका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श अनुसार करना चाहिए।

हमारे संस्थान ने भी उपयुक्त औषधियों के सम्मिश्रण से कुछ रक्तवर्धक एवं खून बढ़ाने वाली औषधि विकसित की है जिसे आप घर बैठे ऑनलाइन आर्डर कर मंगवा सकते हैं।

अगर आप या आपके परिचित में से कोई खून की कमी या हीमोग्लोबिन की कमी से ग्रसित हैं तो वे नीचे दिए लिंक पर जाकर एनीमिया हेल्थ केअर पैक आर्डर कर सकते हैं।

Anaemia Health Care Pack

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कोष्ठशोधन हेतु प्रतिदिन प्रयोग हेतु श्रेष्ठ औषधि (best herbal remedy to clear motion daily)

herbal remedy to clear motion daily

कोष्ठ शुद्धिकरण... आयुर्वेद में रोगों की चिकित्सा का प्रथम कदम। (Best herbal remedy to clear motion daily without any side effect)

आयुर्वेद में कोष्ठ शोधन का विशेष महत्त्व है। यह माना जाता है कि किसी भी रोग की चिकित्सा करने से पहले कोष्ठ शुद्धि हो जाने पर कुछ हद तक दोषों का निर्हरण हो जाता है और शमन औषधियां भी फिर शीघ्र लाभप्रद होती है। कोष्ठ के शोधन हेतु विभिन्न प्रकार कि औषधियां उपलब्ध हैं जैसे हरीतकी चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसकार चूर्ण, अभयादि मोदक, इच्छाभेदी रस, अविपत्तिकर चूर्ण, एरण्ड तेल इत्यादि। इनमे से अधिकांश औषधियां नित्य विरेचन (रोजाना प्रयोग) हेतु उपयुक्त नहीं है। त्रिफला चूर्ण एवं अविपत्तिकर चूर्ण मृदु विरेचक होता है जिसे लम्बे समय तक लिया जा सकता है पर हर रोगी चूर्ण नहीं ले पाता। इसके अलावा अधिक दिनों तक चूर्ण लेने पर आंते रुक्ष होने लगती है।

LAXMAX CAPSULES नित्य विरेचनार्थ एक उपयुक्त औषधि है, जिसका सेवन 1 से 2 कैप्सूल की मात्रा में रोज रात में गुनगुने पानी से लम्बे समय तक किया जा सकता है। इसके प्रमुख घटक में स्वर्णपत्री, त्रिफला, गिलोय, नीम, हल्दी, कुटकी, मरीच, पुदीना एवं दारुहरिद्रा है।

स्वर्णपत्री एवं त्रिफला की मात्रा सिर्फ इतनी ही है कि वह आँतों को बिना उत्तेजित किये मलोत्सर्ग में सहायक हो। इसके अलावा अन्य घटकों का कार्य निम्नानुसार है:
1. गिलोय: त्रिदोष शामक एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना।
2. नीम: कृमिनाशक एवं आँतों के संक्रमण को रोकना।
3. हल्दी: कृमिघ्न, रोगप्रतिरोधक एवं व्रण रोपक
4. कुटकी: लीवर के उत्तम अनुपूरक एवं टॉनिक, विदग्ध पित्त का रेचन कर बाहर निकालता है।
5. मरीच: आँतों में एकत्रित दूषित आम का अवशोषण करता है।
6. पुदीना: आँतों में होने वाले शोथ को कम करता है एवं जलीयांश की पर्याप्त मात्रा बनाये रखता है।
7. दारुहरिद्रा: यह एक श्रेष्ठ व्रणरोपक है। यह anti fungal, anti-bacterial, anti-oxidant, anti-viral, anti-diabetic, anti-tumor और anti-inflammatory गुणों से युक्त होता है।

LAXMAX CAPSULE के सेवन से तुरंत जुलाब नहीं लगते और न ही अगले दिन सुबह मल पतला होकर बाहर निकलता है। यह अत्यंत सौम्य नित्य विरेचक औषधि है जो आँतों को सबल बनाती हुई मल का शोधन करती है।

LAXMAX CAPSULE के बारे में अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: https://www.ayurvitewellness.com/product/laxmax-capsules/

LaxMax Capsules

herbal remedy to clear motion daily

An Ayurvedic laxative (mild)

LaxMax Capsule is an Ayurvedic laxative (mild) used in habitual constipation. It is a perfect combination of some traditional herbs and purified natural ingredients which are time tested and best recommended for habitual and chronic constipation.

Key Ingredients of LaxMax Capsules

  • Swarnapatri (Cassia augustifolia) 200 mg
  • Haritaki (Terminalia chebula) 150 mg
  • Amalaki (Emblica officinalis) 50 mg
  • Vibhitaki (Terminalia bellerica) 35 mg
  • Guduchi (Tinospora cordifolia) 20 mg
  • Neem (Azadirachta indica) 10 mg
  • Haridra (Curcuma longa) 10 mg
  • Kutki (Picrorhiza kurroa) 10 mg
  • Kali Mirch (Piper nigrum) 5 mg
  • Pudina (Mentha piperita) 5 mg
  • Daruharidra (Berberis aristata) 5 mg

Indications of LaxMax Capsules

  • Habitual & Chronic Constipation
  • Abdominal Bloating
  • Piles

Benefits of LaxMax Capsules

  • It softens the stool and enhances intestinal motility which relieves acute and chronic constipation effectively.
  • Due to its laxative property, it assists in excretion without upsetting mineral and water balance in the body
  • It is non-habit forming and does not result in physiological dependency.

Features

  • Recommended by doctors
  • Unique formulation
  • Hygienic processing
  • Manufactured at WHO GMP certified & QMS ISO 9001:2008 certified unit

Dosage

  • 1 to 2 capsules at bedtime with water or as directed by the physician.

Side Effects & Safety

  • Not reported
  • Not recommended for children and pregnancy

Availability

  • 3×10 Capsules in a blister pack

Recommendation:

Ayurvedic liver protective & curative (Livy Capsules)

Ayurvedic appetiser and digestive (Gestizyme Capsules)

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Free Health Camp Dhamtari, Chhattisgarh (22 July 2018)

We are going to organise a free Ayurvedic health camp at Dhamtari city of Chhattisgarh state on 22 July 2018 (Sunday).

Venue: Shri Gayatri Arogyam, HIG-16, Housing Board Colony, Hatkeshar, Dhamtari (C.G.)

Theme: Pain Management, Skin Diseases & Ano-rectal diseases.

Specialist doctors available at camp:

  1. Dr Manish Singh Tomar, MD (Ay)
  2. Dr Leeladhar Sahu, MD (Ay)
  3. Dr Shrinivas Debta, BAMS
  4. Dr Dinesh Kumar Nag, BAMS
  5. Naturopath Mrs Chitra Nag, DNYS, NDYD

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Ayurvedic pharma franchise in Balod, Chhattisgarh

Ayurvedic pharma franchise in Balod, Chhattisgarh

Ayurvite Wellness Private Limited is a leading Ayurveda business & healthcare service provider. We manufacture and export best quality herbal and Ayurveda products. We do manufacture around 350 products (patent products and classical Ayurveda medicines) approved by the ministry of AYUSH, Govt. of India. We are GMP & ISO 9001:2015 accredited.

We offer highly effective products for pharma PCD at very lucrative terms and competitive rates. We are interested to appoint Ayurvedic pharma franchise in Balod, Chhattisgarh

Browse products range

Describe your buying requirements:

(Please include the product name, order quantity, special requests if any in below inquiry form)

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Ayurvedic pharma franchise in Bilaspur, Chhattisgarh

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Ayurvedic pharma franchise in Raigarh

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We offer highly effective products for pharma PCD at very lucrative terms and competitive rates. We are interested to appoint franchise in Ayurvedic pharma franchise in Raigarh, Chhattisgarh.

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Ayurvedic pharma franchise in Raipur

Ayurvedic pharma franchise in Balod, Chhattisgarh

Ayurvite Wellness Private Limited is a leading Ayurveda business & healthcare service provider. We manufacture and export best quality herbal and Ayurveda products. We do manufacture around 350 products (patent products and classical Ayurveda medicines) approved by the ministry of AYUSH, Govt. of India. We are GMP & ISO 9001:2015 accredited.

We offer highly effective products for pharma PCD at very lucrative terms and competitive rates. We are interested to appoint franchise in Ayurvedic pharma franchise in Raipur.

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Viddhagni Workshop Raipur 17.06.2018

Workshop Date: 17 June 2018

Venue: Jagannath Mandir, Gayatri Nagar, Raipur, Chhattisgarh

Theme: “Viddhagni” – Instant Ayurveda Pain Management Treatment

Trainer & Demonstrator: Dr Uday Kulkarni, M.D. (Ay)

Registration Fees: Last date- 15.06.2018

  • Students: ₹500 (Five hundred only). Student id card/ letter by Principal is mandatory during the workshop.
  • Ayurveda Physicians: ₹1200 (One thousand two hundred only)
  • Spot registration: ₹2000 (Two thousand only)

About Viddhagni Karma: 

Ayurveda is changing. We have accepted so many changes, let’s accept makeover of Ayurveda now, from old ways to the new ways. Viddhagni Karma is the fusion of tradition and technology, a fusion of Viddha karma and Agnikarma. Viddhagni is the unique advanced Ayurveda technique to manage various pain instantly. It is very much effective in the treatment of pain due to osteoarthritis, sciatica, lumbar spondylosis, cervical spondylosis, disc bulges, slip disc, plantar fasciitis, calcaneus spur, tennis elbow etc. Viddhagni Karma is also very beneficial for the skin overgrowth & cosmetology.

 

To participate in this workshop, please click on Pay Registration Fees Button, fill the desired information and proceed to pay the fees. Your seat will be confirmed only after fees payment.

REGISTRATION CLOSED

SPOT REGISTRATION CAN BE DONE AT WORKSHOP VENUE ON 17.06.2018, 10:00 am

Online registration and payment related support helpline no. : 7697789405.

Those who are unable to process the online application and online fee payment may deposit the required workshop fee in below bank account. After fee deposition in bank account please send the copy of receipt via WhatsApp to 7697789405 or ayurvite@gmail.com along with your Name, Mobile No., Occupation and Address.

Bank account details:

A/c name- AYURVITE WELLNESS PRIVATE LIMITED
A/C NO.- 099205001890
Account type- Current account
IFSC CODE- ICIC0000992
Bank- ICICI, Branch- Morena

 

Thank you for your cooperation.

Gallery:

https://drive.google.com/drive/folders/1R3r58nYHfjlHjHE_L2DJQS4qDgQ5v-rz?usp=sharing

 

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तमक श्वास (asthma/ दमा रोग) – कारण, लक्षण एवं चिकित्सा

Asthma क्या है?

अस्थमा श्वसन तंत्र (respiratory system) का रोग है जो वायुमार्गों के संकुचित होने के परिणामस्वरूप होता है। ठंडी हवा, प्रदूषित हवा, भावनात्मक तनाव, अत्यधिक व्यायाम, अनुवांशिक  आदि कारणों के प्रतिक्रिया स्वरुप जब हमारे श्वसन तंत्र के वायुमार्ग संकीर्ण हो जाते हैं तो छाती की जकड़न, सीटी की आवाज जैसी सांस चलना, खाँसी और पूरी सांस ना आना आदि लक्षण दिखने लगते हैं। इस लेख में अस्थमा की चिकित्सा का संक्षिप्त वर्णन है (Asthma Ayurvedic View)

Asthma के बारे में आयुर्वेद क्या कहता है? (Asthma Ayurvedic View)

आयुर्वेद में श्वास रोगों के बारे में विस्तृत वर्णन प्राप्त है, जिसके अंतर्गत तमक श्वास रोग के लक्षण asthma के सादृश्य है।

श्वास रोग के कारण एवं संप्राप्ति

धूल,  धुआं, तेज धूप, ठंडी हवा, फेफड़ों या सीने में अभिघात (चोट लगना), ठंडा पानी पीना, संक्रमण, अनुवांशिक इत्यादि। इन कारणों की वजह से कफ दोष श्वासनलिकाओं, जो कि प्राणवायु का मार्ग है, को अवरुद्ध कर देता है। जिसके परिणामस्वरूप वात दोष कुपित होकर प्राणवह, उदकवह तथा अन्नवह श्रोतसों को दूषित कर श्वास रोगों को जन्म देता है।

तमकश्वास रोग के लक्षण

  • शिर, गर्दन, सीने में जकड़न एवं दर्द युक्त खांसी
  • गले में घुरघुराहट, अरुचि, पीनस, तृष्णा
  • कष्टदायक तीव्र वेगयुक्त सांस चलना, आँखों के आगे अँधेरा छाना
  • लेटने पर सांस लेने में तकलीफ एवं बैठकर सांस लेने में सहजता महसूस करना

तमक श्वास चिकित्सा

यह प्रायः याप्य होता है, परन्तु बलवान रोगी का नया तमक श्वासरोग साध्य है।

तमक श्वास में सामान्य औषधीय व्यवस्था पत्र

  1. नायोपायम क्वाथ 10 ml + दशमूलकटुत्रयम क्वाथ 10 ml + 60 ml सुखोष्ण जल, प्रातः सायं नाश्ते एवं भोजन से 1 घंटे पहले
  2. Shwasan Capsules, Septivite Capsules, Ayurvite Rudanti Capsules, तीनो से 1-1 कैप्सूल प्रातः सायं भोजनोपरांत
  3. च्यवनप्राश अवलेह 10 gm (1 चम्मच) प्रातः नाश्ते से 1 घंटे पहले। (c.i. Diabetes)
  4. अगस्त्य हरीतकी/ दशमूल हरीतकी 10 gm (1 चम्मच) रात में सोते समय सुखोष्ण जल से। (c.i. diabetes)

रोग एवं रोगी के बलाबल एवं अवस्थानुसार अन्य औषध निर्देश

  • लक्ष्मीविलास रस
  • श्वास कुठार रस
  • अगस्त्य हरीतकी लेह्य
  • दशमूल हरीतकी लेह्य
  • सितोपलादि चूर्ण- कफ की अधिकता में
  • श्वासकास चिंतामणि रस (स्वर्णयुक्त)- रोग की तीव्रता में, दौरा दूर होने के बाद पित्त की प्रधानता पर, अजीर्णजनित तमक श्वास में, हृदयरोग के साथ होने पर, वृद्धावस्था में, तम्बाखू व्यसनी में, श्वास कृच्छ्ता में, वंशानुगत में, दुर्बलता में।
  • चतुर्भुज रस- श्वास कृच्छ्ता में।
  • श्रृंगाराभ्र रस- कफाधिक्य में, अधिक बलगम आने पर।
  • स्वर्णबसंत मालती रस- श्वसनतंत्र सम्बन्धी सभी रोगों में विशेषतः वातपित्तज भेद में, वृद्धावस्था में, वंशानुगत में, दुर्बलता में।
  • कफकेतु रस- कफाधिक्य होने पर।
  • कनकासव- पित्त प्रधानता एवं पित्तज प्रकृति वालों को न दें।
  • चन्द्रामृत रस- सूखी खांसी या खांसी के साथ खून आने पर।
  • वासावलेह- केवल कफज अवस्था या रक्त आने पर प्रयोग करें, सूखी खांसी में न दें। वातानुबंध अवस्था एवं वृद्ध रोगी में इसका प्रयोग सतर्कता से करें अन्यथा खांसी बढ़ सकती है।
  • तालीसादि चूर्ण- शुष्ककास युक्त श्वास रोग
  • रसमाणिक्य- संक्रमण एवं शोथ में, राजयक्ष्मा के साथ।
  • रसकर्पूर- तीव्र वेग में।

रसौषधियों एवं स्वर्ण रजत मुक्त युक्त बहुमूल्य औषधियों का अन्नावश्यक प्रयोग न करें। यह अवधारणा निकाल दें कि सिर्फ स्वर्णघटित योग या रसयोग ही रोगमुक्ति का उपाय है। रोग की तीव्रता, तत्काल लाभ या अन्य औषध प्रयोग के विफल होने पर ही इनका प्रयोग करें।

तमक श्वासरोग में पंचकर्म चिकित्सा निर्देश

  1. सर्वप्रथम वमन या विरेचन हेतु रोगी परीक्षण करें। यदि योग्य हो तो स्नेहपान से पूर्व रुक्षणार्थ 3 दिन त्रिकटु चूर्ण 5 gm या Ayurvite Trikatu Capsule 1 प्रातः सायं सुखोष्ण जल से दें।
  2. चौथे दिन से उचित स्नेह का निर्धारण कर स्नेहपान विधि अनुसार 5 से 7 दिन स्नेह पान करवाएं।
  3. सम्यक स्निग्ध लक्षण आने पर स्नेहपान बंद कर 2 दिन अभ्यंग एवं वाष्प स्वेदन करें। इसके बाद एक दिन विश्रामकाल के लिए छोड़कर प्रातः अभ्यंग, वाष्प स्वेदन कर वमन या विरेचन कर्म करें। सम्यक शुद्धि लक्षण अनुसार 3 या 5 दिन संसर्जन कर्म करें।
  4. यदि रोगी वमन या विरेचन के योग्य ना हो तो श्वासरोग हर यथाविधि वस्ति भी दी जा सकती है।

आयुर्वेद में अन्य अनेक औषधीय एवं पंचकर्म प्रयोग वर्णित हैं। हमने यहाँ हमारे चिकित्सा केन्द्रों में प्रयोग किये जाने वाले योगों का वर्णन किया है। आपके सुझाव एवं प्रतिक्रियाएं सादर अपेक्षित है।

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Ayurvedic Doctor with Experience in Panchakarma

Title: Ayurvedic Doctor with Experience in Panchakarma

Location: Raipur (Chhatisgarh)

Total openings: 1

Salary: Negotiable

Other perks: No

Job Type: Full-time

Description:

We are looking for the suitable candidates (experienced) for an opening of the above-mentioned position. We need dedicated personnel who can be loyal to the company and have good clinical and patient handling skills.

Responsibilities and Duties:

  • To consult the patients in OPD.
  • To right prescription and advice Panchakarma therapies as per their requirement.
  • To guide the patients about Ayurvedic diet and lifestyle based on their problems.
  • To manage the centre by keeping medicines stock record, guide therapists and other staff.
  • To generate revenue to maintain proper functioning of the centre.

Qualifications and Skills:

  • BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicines & Surgery).
  • Should have minimum 2 years of clinical experience in Panchakarma.
  • Good communication skills in Hindi.

How to apply:

Please send your resume to ayurvite@gmail.com with vacancy title (see the post title above) as the subject line.

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Vacancy for the post of MARKETING EXECUTIVE (Ayurveda)

Title: Marketing Executive (Ayurveda)

Location: Raipur, Bilaspur, Raigarh (Chhatisgarh)

Total openings: 3

Salary: ₹ 96,000 to 2,50,000 per anum (negotiable)

Other perks: Incentives and travel expense

Job Type: Full-time

Description:

We are looking for the suitable candidates (experienced) for an opening of the above-mentioned position. We need dedicated personnel who can be loyal to the company and have good marketing skills to achieve desired targets of the company.

Responsibilities and Duties:

  • To represent the company to the doctors, clients and distributors in allocated areas.
  • To introduce and demonstrate our products range to the clients.
  • Responsible for generation business, clients and conversion of leads.
  • Generate new business clients, industry and prospects on market research and personal networking.
  • Provide support to the leadership team in negotiations, contract development, due diligence, and other business development or alliance development projects.
  • Drive sales focus on the organization by ensuring uniform and robust processes to identify, track, pursue, and win deals.
  • Coordinating with customer support team and clients.
  • Taking purchase orders from customers and facilitate arrangements for the delivery of their orders.

Qualifications and Skills:

  • Minimum: Graduate (science stream will be prefered) with minimum 1 year of work experience in Ayurvedic products marketing or pharma marketing.
  • Good communication skills.
  • Should have personal vehicle to run in field

How to apply

Please send your resume to ayurvite@gmail.com with vacancy title (see the post title above) as the subject line.

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Osteoarthritis (संधिवात) – Sign, Symptoms, Treatment in Ayurveda (Hindi)

Osteoarthritis (संधिवात) क्या है

Osteoarthritis या degenerative joint disease, एक जीर्ण संधिगत रोग है जो कि arthritis का ही एक प्रकार है। हमारे शरीर के सभी संधि (joints) स्नायु एवं पेशियों  से कसे हुए रहते हैं जिससे उनकी सुरक्षा एवं गतिशीलता सुनिश्चित हो सके। इन्हीं स्नायुवों को आधुनिक विज्ञान में cartilage कहा जाता है। Cartilage हड्डियों एवं जोड़ों के चारों तरफ लिपटकर गद्दे की तरह उसकी सुरक्षा करता है।

जोड़ों के स्नायुं तंत्र में क्षरण (degeneration) की स्थिति होने पर स्नायु की कोशिकाएं टूटने लगती हैं जो कि osteoarthritis की प्रमुख वजह होती है। Cartilage के क्षरण (Cartilage breakdown) के कारण हड्डियाँ आपस में रगड़ने लगती हैं जिसकी वजह से दर्द एवं गतिशीलता की कमी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

सामान्यतः उम्र के मध्य में एवं बुजुर्गों को osteoarthritis की तकलीफों का सामना करना पड़ता है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से घुटनों, हाथों, कमर एवं गर्दन के जोड़ों पर होता है।

सामान्य बोलचाल में rheumatoid arthritis, gouty arthritis एवं osteo arthritis तीनों रोगों को arthritis कह दिया जाता है, परन्तु ये तीनों अलग अलग रोग हैं एवं तीनों रोगों के कारण, लक्षण एवं चिकित्सा अलग अलग होती है। सिर्फ जोड़ों या हड्डियों में दर्द होना ही एकमात्र समानता है।

Osteoarthritis के बारे में आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार osteoarthritis वातदोष के प्रकुपित होने पर होने पर होता है, एवं इससे मुख्यतः हमारे जोड़ या संधि प्रभावित होते हैं। इसीलिए इसे संधिवात रोग कहा जाता है।

वात दोष हमारे शरीर में वायु तत्व या हवा का प्रतिनिधित्व करता है जो शरीर के सभी गतियों, प्रवाह एवं मष्तिष्क को नियंत्रित करता है।

संधिवात में वात दोष विशेषतः संधियों में बढ़ने लगता है। चूंकि रुक्षता वात का प्रधान गुण है, वह शरीर के स्नेह (fluidity) का अवशोषण करता है। वात शरीर का क्षरण एवं अपचय (destructive & catabolic) भी करता है। इन्हीं गुण एवं कर्मों की वजह से वात दोष का संधियों में प्रकुपित या बढ़ने की स्थिति पर वह संधियों से cartilage का क्षरण एवं synovial fluid का क्षय करता है। एवं जोड़ों में दर्द आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

संधिवात के कारण (Causes of osteoarthritis)

रुक्ष या सूखा, ठंडा या बासी भोजन, अत्यधिक शीत एवं शुष्क मौसम, व्यवसाय की वजह से जोड़ों का अधिक इस्तेमाल होना, मोटापा, जोड़ों में चोट, आनुवंशिकता और बुढ़ापा।

संधिवात के लक्षण (Symptoms of osteoarthritis)

  • जोड़ों में दर्द
  • जोड़ों में सूजन
  • संधियों के हिलने या चलने पर कट कट की आवाज आना
  • संधियों की अकर्मण्यता या कठोरता

संधिवात चिकित्सा (Osteoarthritis treatment in Ayurveda)

संधिवात की आयुर्वेदिक चिकित्सा ना सिर्फ संधियों या स्नायुओं के क्षरण एवं क्षय को रोकता है बल्कि ये क्षीण हुए स्नायु एवं संधि के नवकोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है। आयुर्वेदिक औषधियों एवं पंचकर्म चिकित्सा द्वारा संधियों में स्नेहांश की वृद्धि होकर उनकी गतिशीलता बढ़ती है एवं जोड़ों को मजबूती मिलती है।

आयुर अमृतम क्लीनिक में हम दोषों की प्रधानता, कारण, लक्षण, काल एवं रोगी के वय की समीक्षा करने के पश्चात आयुर्वेदिक औषधियों एवं आवश्यकतानुसार पंचकर्म चिकित्सा का प्रयोग कर संधिवात की चिकित्सा करते हैं।

यूँ तो आयुर्वेद में वात रोगों की चिकित्सा हेतु अनेक योग एवं परिकल्पनाएं वर्णित हैं, किन्तु इस लेख में सिर्फ हमारे चिकित्सा केन्द्रों में प्रयोग की जाने वाली औषधियां एवं चिकित्सकीय क्रियाओं का वर्णन कर रहें हैं।

नोट: स्वचिकित्सा हानिकर हो सकती है। पाठकों से निवेदन है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें।

संधिवात में सामान्य औषधीय व्यवस्था पत्र (Ayurvedic prescription for osteoarthritis)

  1. आयुरअमृतम वातहर गुगुल/ योगराज गुगुल/ महायोगराज गुगुल/ रास्नादि गुगुल (सभी प्रकार के दर्द में)/ सिंहनाद गुगुल (दोषों के आमावस्था की स्थिति में)/ त्रयोदशांग गुगुल या Ayurvite Arthrozyl Capsules (कमर दर्द, गर्दन के दर्द जिनमें वातनाड़ियां/ nerves भी आक्रांत होती हैं। हाथों अथवा पैरों में झुनझुनी या radiating pain की स्थिति में) – 1-1 प्रातः सायं भोजन के बाद
  2. चंद्रप्रभा वटी – 1-1 प्रातः सायं भोजन के बाद
  3. पुनर्नवादि वटी/ दशमूल घन सत्व टेबलेट – 1-1 प्रातः सायं भोजन के बाद

– मोटापे की स्थिति में Size Zero capsules 1-1 प्रातः सायं भोजन से आधे घंटे पूर्व अवश्य दें।

– कब्ज होने पर एरण्ड तेल 10-20ml रोगी के बलाबल का विचार कर रात में सोते समय गुनगुने दूध या पानी से दें।

जीर्ण संधिवात में उपरोक्त औषधियों के साथ निम्नलिखित औषधियों का भी प्रयोग किया जा सकता है-

  1. आयुरअमृतम वातहर चूर्ण 60gm, गोदंती भस्म 10gm, पुनर्नवा चूर्ण 60gm, त्रिफला चूर्ण/ एरण्डमूल चूर्ण 60gm, दशमूल चूर्ण/ अश्वगंधादि चूर्ण/ शतावर्यादि चूर्ण 60gm – 1-1 चम्मच (4-5gm) प्रातः सायं भोजन से 1 घंटे पूर्व गुनगुने जल से लें।

संधिवात में पंचकर्म चिकित्सा (Panchakarma in osteoarthritis)

  1. आमावस्था होने पर उद्वर्तनं अथवा चूर्ण पिण्ड स्वेद 1-3 दिन या निरामावस्था होने तक
  2. अभ्यंगम, सर्वांग वाष्प स्वेदन या पत्र पिण्ड स्वेद, योग वस्ति या काल वस्ति
  3. जानू वस्ति या पिचु, कटि वस्ति या पिचु
  4. उपनाहम या लेपम
  5. कषाय या तेल धारा (काय सेकम)
  6. क्षेत्रीय नाड़ी स्वेदन
  7. अग्निकर्म

आयुर्वेद में अन्य बहुत से औषधीय योग एवं पंचकर्म चिकित्सा व्यवस्था हैं जिनका निर्धारण चिकित्सक रोग एवं रोगी की अवस्था के अनुसार अपने अनुभव से करता है। ֍֍֍

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Psoriasis (किटिभ) – Sign, Symptoms, Treatment in Ayurveda (Hindi)

Psoriasis क्या है?

त्वचा रोगों में अप्रत्याशित लक्षणों वाला जटिल रोग Psoriasis सबसे अधिक कष्टदायक होता है। सामान्यतः त्वचा की अंतर्निहित कोशिकाएं नियमित रूप से बनती एवं बढ़ते रहती हैं । वे त्वचा की सतह तक पहुंचती हैं और फिर नष्ट हो जाती हैं । Psoriasis में त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से लगभग 10 गुना तेज़ी से बढ़ने लगती हैं। उनकी मात्रा में एकाएक वृद्धि होने की वजह से सफेद, रुक्ष उभार युक्त लाल या कत्थे रंग के चमकीले या धूसर व्रण (patches) उत्पन्न हो जाते हैं।   रुक्षता बढ़ने पर व्रण के उपरी सतह की त्वचा छिलके की तरह निकलने लगती है। सोरायसिस आमतौर पर घुटने, कोहनी और सिर पर होता है।  यह शरीर के अन्य हिस्से जैसे छाती, पेट, पीठ, हथेलियों और पैरों के तलवों को भी प्रभावित कर सकता है। Psoriasis संक्रामक रोग नहीं है। इस लेख में हम सोरायसिस के कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं पंचकर्म के बारे में संक्षिप्त में (Psoriasis treatment in Ayurveda) चर्चा करेंगे।

Psoriasis के बारे में आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद में Psoriasis का वर्णन कुष्ठ रोगाधिकार में किया गया है। “कुष्ठ” रोग में सभी प्रकार के त्वचा रोगों को समाहित किया गया है। आयुर्वेद मनीषियों ने कुल 18 प्रकार के त्वचा रोगों को कुष्ठ रोगाधिकार में विस्तार पूर्वक वर्णित किया है। इन 18 प्रकार के कुष्ठ रोगों में से किटिभ एवं एककुष्ठ के लक्षण Psoriasis से काफी मिलते जुलते हैं। ये दोष निर्दिष्ट निदान (कारण) जैसे विरुद्ध आहार (उदाहरण – दूध के साथ नमक या खट्टे खाद्य पदार्थ, ठंडे के गर्म खाद्य पदार्थ इत्यादि), तैलीय खाद्य पदार्थों का निरंतर सेवन करने, मानसिक तनाव, छर्दि (उल्टी) के वेग को रोकने के कारण विषाक्त पदार्थों के त्वचा में संचय होने से प्रकुपित होते हैं। ये विषाक्त पदार्थ रस (nutrient plasma), रक्त (blood), मांस (muscles) और लसिका (lymphatic) जैसी गहरी ऊतकों में जमा होते हैं। ये विषाक्त पदार्थ गहरे ऊतकों के प्रदूषण का कारण बनते हैं, जो सोरायसिस को जन्म देती हैं।

दोषों की प्रधानता, समय एवं कारणों के अनुसार बदल सकती है। इसी वजह से कई बार एक कुष्ठ कालातीत होने पर किटिभ के लक्षणों से युक्त हो जाता है अथवा किटिभ, एक कुष्ठ के समान निर्दिष्ट होने लगता है। सभी प्रकार के कुष्ठ रोग त्रिदोषज होते हैं परन्तु दोषों के बलाबल का लक्षणों के अनुसार विचार कर ही चिकित्सा करनी चाहिए।

Psoriasis treatment in Ayurveda (सोरायसिस की आयुर्वेदिक चिकित्सा)

लक्षणों एवं दोष प्रधानता की सही परख एवं अवलोकन करने के पश्चात ही सोरायसिस की चिकित्सा की जानी चाहिए। सोरायसिस के मामलों में आयुर्वेदिक उपचार का प्राथमिक उद्देश्य रक्त और ऊतकों का शुद्धिकरण है। शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ किया जाता है और आगे के संचय को रोकने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग किया जाता है। धातुपोषक, व्रणहर एवं वर्ण्य औषधियों को लेप अथवा तेल के रूप में  त्वचा के पूर्ण उपचार को बढ़ावा देने, ऊतकों को मजबूत एवं सुदृढ़ करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

यूँ तो आयुर्वेद में कुष्ठ रोगों की चिकित्सा हेतु अनेक योग एवं परिकल्पनाएं वर्णित हैं, किन्तु इस लेख में सिर्फ हमारे चिकित्सा केन्द्रों में प्रयोग की जाने वाली औषधियां एवं चिकित्सकीय क्रियाओं का वर्णन कर रहें हैं। स्वचिकित्सा हानिकर हो सकती है। पाठकों से निवेदन है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें।

Psoriasis में पंचकर्म

वमन, विरेचन, वस्ति कर्म, रक्तमोक्षण, तक्रधारा, सर्वांग कषाय धारा इत्यादि

दोष, काल, वय एवं रोगी बल का विचार कर उपरोक्त पंचकर्म एवं उपकर्म में से निर्देशित कर रोगी पर प्रयुक्त कराया जाता है। इन कर्मों के पूर्वकर्म एवं पश्चातकर्म का भी चिकित्सक के निर्देशानुसार पालन करना आवश्यक होता है।

Psoriasis की आयुर्वेदिक औषधियाँ

आरग्वाधादि कषायं, मजिष्ठादि कषायं, शोणितअमृतादि कषायं, पटोलादि कषायं, गंधक रसायन, रसमाणिक्य, तालसिंदूर, आरोग्यवर्धिनी वटी, पुनर्नवादि वटी, गिलोय, पंचनिम्बादि चूर्ण, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, महातिक्तकम घृतं/ कषायं, गुगुलुतिक्तकम घृतं/ कषायं, Skinzyl Capsules, Septivite Capsules, Livy Capsules, Shayanam Capsules इत्यादि

Psoriasis में सामान्य चिकित्सा व्यवस्था पत्र

पित्त की प्रधानता में

  1. मंजिष्ठादि कषायं, गुगुलुतिक्तकम कषायं – 15-15 ml औषधि 60 ml जल में मिलाकर प्रातः सायं भोजन से 1 घंटे पूर्व
  2. गंधक रसायन, पंचतिक्तघृत गुगुल, Skinzyl Capsules – 1-1 वटी/ कैप्सूल प्रातः सायं भोजन के पश्चात
  3. मणिभद्र गुड़म – 10 ग्राम रात्रि भोजनोपरांत सुखोष्ण जल के अनुपान से
  4. विरेचन कर्म, तक्रधारा

कफ की प्रधानता में –

  1. आरग्वधादि कषायं, निम्बादि कषायं – 15-15 ml औषधि 60 ml जल में मिलाकर प्रातः सायं भोजन से 1 घंटे पूर्व
  2. कैशोर गुगुल, आरोग्यवर्धिनी वटी, Skinzyl Capsules – 1-1 वटी/ कैप्सूल प्रातः सायं भोजन के पश्चात
  3. वमन कर्म, कषाय धारा

वात की प्रधानता में

  1. पटोलादि कषायं, गुगुलुतिक्तकम कषायं – 15-15 ml औषधि 60 ml जल में मिलाकर प्रातः सायं भोजन से 1 घंटे पूर्व
  2. कैशोर गुगुल, आरोग्यवर्धिनी वटी, Skinzyl Capsules – 1-1 वटी/ कैप्सूल प्रातः सायं भोजन के पश्चात
  3. महातिक्तकम घृतं – 10 ग्राम रात्रि भोजनोपरांत सुखोष्ण जल के अनुपान से
  4. वस्ति कर्म, शिरोधारा

नोट- मानसिक तनाव कि स्थिति में शयनम कैप्सूल्स एवं पाचन क्रिया सम्बन्धी अनियमिता में लिवी कैप्सूल्स  का प्रयोग किया जाना लाभप्रद पाया गया है।

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Best Ayurvedic drug of choice for various types of cancer & associated symptoms (Clinically proven)

Cancer is a deadly disease or condition which has no cure in the later stage or when diagnosed late. In Ayurvedic classical texts, there are lots of medicines indicated to treat such conditions. This article will be helpful for Ayurvedic doctors to write a better prescription for cancer patients. In this post, you may find some helpful herbs and medicines which can be added in your prescription.

Best Ayurvedic Medicine for cancer

Drugs and Herbs of Ayurveda used in cancer according to systemic involvement:

  1. Brain Cancer
    1. Mandukaparni
    2. Kastoori Bhairav Rasa with a combination of special herbs.
  2. Oropharyngeal Cancer
    1. Kasamarda
    2. Mahalaxmi vilas Rasa
  3. Lung Cancer
    1. Pippali
    2. Heerak Bhasma
  4. Stomach Cancer
    1. Shatavari
    2. Amlaki
    3. Banga Bhasma
    4. Aloe-Vera
    5. Amaltas
    6. Bhumyamalaki
    7. Sharphunkha
  5. Intestinal Cancer
    1. Shigru
    2. Panchamrit parpati
  6. Female Genital Cancer
    1. Ashoka
    2. Vaikranta Bhasma
  7. Male Genital Cancer
    1. Triphala
    2. Bang bhasma
    3. Makardhvaja
  8. Liver Cancer
    1. Bhumyamalaki
    2. Arogyavardhini vati
  9. Blood Cancer
    1. Anantmula
    2. Suvarna Vasant Malti Rasa
  10. Bone Cancer
    1. Aabha Gugglu
    2. Madhu Malini Vasant Rasa
  11. Breast Cancer
    1. Gojivha
    2. Chinchabhallataka
  12. Skin Cancer
    1. Manjishtha
    2. Samira Panaga Rasa
    3. Kaishore Gugglu
    4. Gandhak Rasayan

Ayurvedic medicines which may be added to the above medicines according to the general condition of the patient. These are as follows:

  1. Sutashekhar rasa
  2. Punarnava Mandura
  3. Aarogya Vardhini
  4. Avipattikar Churna
  5. Kamadhugdha Rasa
  6. Swarna Gairika
  7. Laghu Vasant Malti
  8. Hirak Bhasma

Medicines to be added according to the Agni (digestive fire) of the patient:

  1. Drakshasava
  2. Swarna Makshika Bhasma
  3. Shivakshara Pachan Churna
  4. Chitrakadi Vati
  5. Trifala Churna
  6. Panchskhar Churna

Ayurvedic medicines useful in all types of cancers

  1. Kanchnara Gugglu
  2. Kaishore Gugglu
  3. Bhallatak Phalmajja Churna
  4. Trifala Gugglu
  5. Tribang Bhasma
  6. Shilajatu Vati
  7. Aabha Gugglu
  8. Laksha Gugglu

Drug of Choice according to the affected Nadi

  1. Vishtinduka for Vatta Nadi
  2. Katuki for Pitta Nadi
  3. Bhallatak for Kapha Nadi
  4. Combination of above for dvidosha Nadi
  5. All three for Tridosh Nadi

Ayurvedic Decoctions (Kwath) for purification of body cells Prescribed to all patients.

One, two or more from the following

  1. Varunadi Kwath
  2. Panchvalkal Kwath
  3. Manjishthadi Kwath
  4. Dashmula Kwath
  5. Varunadi Kwath
  6. Kanchnar Kwath

Drug of choice for symptomatic relief

  1. All Gugglu preparations for pain relief and reducing tumour size.
  2. Gandhak Rasayan for infections
  3. Bilva, Mayurpichha, Tankan, sphatika for loose motions and vomiting
  4. Shigru, Chitrakadi vati for pain in the abdomen
  5. Rohitaka, Shyonaka yoga for pain in the pancreas and renal colic.
  6. Shirashooladi vajra rasa, for headaches
  7. Beejapuraka and trikatu in jaundice
  8. Vasa and Goat milk in bleeding
  9. Aabha and Madhumandura in bone pain

The Ayurvedic should correlate the conditions of a cancer patient clinically and then choose medicines accordingly.

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Clinically Tested Ayurvedic Medicines for Diarrhoea in Children

Hello, readers!Today I want to share one of my best clinical experience in treating a serious case of diarrhoea in 6 months old baby girl Gayatri.

Today I want to share one of my best clinical experience in treating a serious case of diarrhoea in children in a 6 months old baby girl Gayatri.

Gayatri and her parents live in a small village with no primary health centre or hospital. One morning, Gayatri’s mother called me and said that Gayatri is suffering from frequent loose motion since 3 days. The stool is completely watery and whitish in colour. The interval between 2 motion is 15 to 20 minutes and maximum up to 60 minutes. We took her to a government hospital ( PHC) located 10kms away from our village. The doctor gave some syrups and 2 injectables but of no use. Then we consulted a private MBBS practitioner and then to the district hospital. They admitted her overnight, used the conventional medicines and IV infusions. Even after 3 days of treatment, she is not ok and became very weak.

I asked current and past history in brief and advised a few Ayurvedic medicines on phone. Then she asked me whether we should continue allopathic medicines which doctors prescribed her along with your Ayurvedic medicines or not. As Gayatri is not responding to these medicines since 4 days, I said you may stop and start my medicines.I was confident with my medicines as I used them earlier in around 54 children with same problems but was curious to know Gayatri’s condition next day. They didn’t inform me about her current health. After 5 days, I met Gayatri’s father accidentally in a shop. I asked about her health. Her father said she is absolutely fine now. She started recovering after 2 doses of your medicines and was completely ok within 2 days. She is now taking regular baby food and enjoying. I smiled and came back to my home.

I was confident with my medicines as I used them earlier in around 54 children with same problems but was curious to know Gayatri’s condition next day. They didn’t inform me about her current health. After 5 days, I met Gayatri’s father accidentally in a shop. I asked about her health. Her father said she is absolutely fine now. She started recovering after 2 doses of your medicines and was completely ok within 2 days. She is now taking regular baby food and enjoying. I smiled and came back to my home.

For your reference below is the Ayurvedic prescription which I usually use in Diarrhoea in Children:

1. Giloy Satva 5gm
Sitopladi Churna 10gm
Jaharmohra pishti 5gm
Mukta pishti 2gm

Mix all of the above medicinal powder and give her 2 pinches mixed with mother’s milk 3 times a day.

2. Kutajghan Vati – crush half tab (125mg) and give along with mother’s milk or honey twice a day.

3. Arvindasava – 5ml mixed with 10ml water twice a day.

Thanks for spending your precious time. Hope, this will help you in your Clinical Ayurvedic practice.

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Related product: Dysent Capsules: Best Ayurvedic medicine for Diarrhoea & Dysentery in adults

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Why Ghrita based Medhya Rasayana are good for PCOS/ PCOD (Polycystic Ovarian Disease)

Ghrita based Ayurvedic medicines are special Ayurvedic medicines in which herbs are processed and prepared in Ghrita (ghee). Or we can say, we use Ghee as a base material to prepare this kind of Ayurvedic medicine.

Read: Ayurvedic Ghrita (Medicated Ghee): How to prepare & Characteristics

As of my clinical experience in most of the PCOS/ PCOD case, adding a Medhya Rasayan in treatment gives a miraculous result (especially in Ghritam form like Kalyanaka ghritam, Sukumara ghritam, Brahmi ghritam).

Medhya Rasayana is the Ayurvedic medicine or supplements beneficial for brain and nervous system. They may be a single herb or a polyherbal formula or purified and processed herbo-mineral combination. It helps in normalisation of endocrinal secretions and leads to hormonal balance. Also, it helps to check the mood swing which commonly found in this case.

In the case of PCOD, it helps in normalisation of endocrinal secretions, balances hormonal level, checks the mood swing and other psychological symptoms.

The reason behind preferring Ghrita based Medhya Rasayan instead of other Medhya Rasayana Kalpa (like Kashayam, Vati, Arishtam, Churna etc.) is that the Ghrita is the only medium which crosses the blood-brain barrier and hence works effectively in diseases with psychosomatic involvement.

Other medicines which I usually prescribe in PCOD acc to the case are :

  • Kalyanak kashayam
  • Varanadi kashayam
  • Saptasaram Kashayam
  • Kachnar gugul
  • Chandraprabha Vati
  • Punarnavadi Vati
  • Manasmitram Vatakam
  • Kankayan Gulika (Gulma)
  • Dhanwantaram Gulika etc.

Panchakarma for PCOD

A systemic combination of various Panchakarma therapies like Abhyangam, Swedana, Patra Pottali Swedana, Udvartana, Shirodhara, Virechanam, Vasti and Nasyam are also recommended for detoxification of vitiated dosha.

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Kumaryasava

Kumaryasava (also spelt as Kumaryasavam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is beneficial for digestive problems like indigestion, bloating, abdominal distension, piles, ulcer and loss of appetite. It is also recommended in various urinary and gynaecological problems. It is termed due to its active ingredient Kumari (aloe vera).

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Kumaryasava

  1. Kumari rasa (Ghrit Kumari) 12.288 L
  2. Guda 4.800 kg
  3. Makshika (Madhu) 2.400 kg
  4. Pakva Loha (Lauha) bhasma 24 g
  5. Shunthi 24 g
  6. Maricha 24 g
  7. Pippali 24 g
  8. Lavanga 24 g
  9. Tvak 24 g
  10. Ela (Sukshmaila) 24 g
  11. Patra (Tejapatra) 24 g
  12. Nagakeshara 24 g
  13. Chitraka 24 g
  14. Pippali mula 24 g
  15. Vidanga 24 g
  16. Gajapippali 24 g
  17. Chavika (Chavya) 24 g
  18. Hapusha 24 g
  19. Dhanya (Dhanyaka) 24 g
  20. Kramuka (Puga) 24 g
  21. Katurohini (Katuka) 24 g
  22. Musta 24 g
  23. Haritaki 24 g
  24. Bibhitaka 24 g
  25. Amalaki 24 g
  26. Rasna 24 g
  27. Devadaru 24 g
  28. Haridra 24 g
  29. Daruharidra 24 g
  30. Murva 24 g
  31. Madhursa (Yashtimadhu) 24 g
  32. Danti 24 g
  33. Pushkaramula (Pushkara) 24 g
  34. Bala 24 g
  35. Atibala 24 g
  36. Kapikacchu (Atmagupta) 24 g
  37. Trikantaka (Gokshura) 24 g
  38. Shatapushpa (Shatahva) 24 g
  39. Hingupatri 24 g
  40. Akallaka (Akarakarabha) 24 g
  41. Utingana 24 g
  42. Shveta Punarnva 24 g
  43. Rakta Punarnava 24 g
  44. Lodhra 24 g
  45. Dhatumakshika (Makshika) bhasma 24 g
  46. Dhataki 384 g

(Reference: Sharangadhara Samhita, Madhyama khanda, Adhyaya: 10; 18-27 1/2).

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Kumaryasava

12 - 24 ml mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Agnimandya (Digestive impairment)
  2. Paktishula (Duodenal ulcer)
  3. Parinama Shula (Duodenal ulcer)
  4. Udavarta (Condition in which there is upward movement of Vayu)
  5. Mutrakricchra (Dysuria)
  6. Prameha (Urinary disorders)
  7. Ashmari (Calculus)
  8. Raktapitta (Bleeding disorder)
  9. Apasmara (Epilepsy)
  10. Shukra Dosha (Vitiation of semen)
  11. Krimi (Helminthiasis/ Worm infestation)
  12. Smriti Kshaya (Loss of memory)
  13. Daurbalya (Weakness)
  14. Udara roga (Diseases of abdomen/ enlargement of abdomen)
  15. Karshya (Emaciation)
  16. Kshaya (Phthisis)
  17. Aruchi (Tastelessness)
  18. Vaivarnya (Discolouration)

Therapeutic Uses

  • In digestive impairment, Kumaryasava is recommended in prescribed dose along with Chitrakadi Vati or Agnitundi Vati (125-250 mg) twice a day after meal.
  • In duodenal ulcer, it is used along with Kamdudha Ras (125mg), Shankha Vati (125mg) and Kutaj Vati (125mg) twice a day after meal.
  • In condition in which there is upward movement of Vayu (a type of bloating or gastric trouble), it is used along with Hingwashtaka Churna or Shivakshar Pachan (2-5 gm) twice a day after meal.
  • In dysuria, Kumaryasava is taken in prescribed dose along with Chandraprabha Vati (500mg), Gokshuradi Gugul (500mg) and Punarnavadi Vati (250mg) twice a day after meal. Also, Shwet Parpati (125mg) is advised 1 hour before a meal twice daily with Dhanyak Panak (coriander leaf juice).
  • In urinary disorders, it is taken in prescribed dose along with Chandraprabha Vati (500mg), Gokshuradi Gugul (500mg) and Punarnavadi Vati (250-500mg) twice a day after meal.
  • In urinary and gall bladder calculus, it is taken twice a day in prescribed dose. Also, Pashanbhed Churna (2-5 gm), Punarnavadi Vati (250mg) and Chandraprabha Vati (500mg) are recommended.
  • In bleeding disorder, 15 ml of Kumaryasava is mixed with 15 ml of Chandanasava or Ushirasava and 30ml water. This mixture is taken twice a day along with Bolbaddha Ras (250mg).
  • In epilepsy, Brahmi Vati (125-250mg) or Manasmitram Vati (125mg) and Kalyanaka Kashayam (15 ml + 60 ml water) are taken twice a day 1 hour before breakfast and dinner. Kumaryasava is taken twice daily after a meal. Kalyanaka Ghritam or Brahmi Ghritam (10 - 20 ml) is taken after dinner with lukewarm milk.
  • In vitiation of semen, it is taken along with Chandraprabha Vati (500mg) and Gokshuradi Gugul (500mg). Shukramatrika Vati (250mg) may also be added.
  • In helminthiasis/ worm infestation, it is taken twice a day in recommended dose mixed with equal quantity of Vidangasava (and water) along with Krimikuthar Ras (125-250 mg).
  • In the loss of memory, Kumaryasava (15 ml) is mixed with Saraswatarishta (15 ml) and water (30 ml) and taken twice daily after a meal. Smriti Sagar Ras (125 mg) and Brahmi Vati (125 mg) is also added to this.
  • In weakness, it may be mixed with Lohasava and taken in prescribed dose. Also, Shatavari Churna (3-5 gm) and Ashwagandha Churna (2 gm) are recommended.
  • In diseases of abdomen/ enlargement of the abdomen, Punarnavasava (15 ml) is mixed with it and diluted in 30 ml of water and taken twice a day after a meal. In ascites, Jalodarari Ras (125 mg) and Punarnavadi Vati (250 mg) are also added.
  • In emaciation and phthisis, Kumaryasava is taken twice daily in prescribed dose. Shatavaryadi Churna (3-5 g) and Chitrakadi Vati (250 mg) are also added.
  • In tastelessness, it is taken along with Chitrakadi Vati (250 mg) twice a day after a meal.
  • In discolouration of the body, it is prescribed along with Punarnavadi Mandur (250 mg)

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. Classically prepared Kumaryasava is the best medicine for duodenal ulcer and hyperacidity. But, it is better to avoid it in patients with ulcers and hyperacidity due it's suspicious quality available in the market.
  2. Not recommended in diabetes.
  3. It should be avoided during pregnancy.
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Kutajarishta

Kutajarishta (also spelt as Kutajarishtam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is beneficial for diarrhoea with bleeding, dysentery, malabsorption syndrome. It is termed due to its active ingredient Kutaja.

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Kutajarishta

  1. Kutajamula (Kutaja) 4.800 kg
  2. Mridvika (Draksha) 2.400 kg
  3. Madhuka Kusuma 480 g
  4. Kashmari (Gambhari) 480 g
  5. Water for decoction 49.152 L  reduced to 12.288 L
  6. Guda 4.800 kg

Prakshepa Dravyas:

  1. Dhataki 960 g

(Reference: Bhaishajyaratnavali,  Atisaradhikara: 97-99)

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Kutajarishta

12 - 24 ml mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Jvara (Fever)
  2. Grahani (Malabsorption syndrome)
  3. Raktatisara (Diarrhoea with Bleeding )
  4. Agnimandya (Digestive impairment)

Therapeutic Uses

  • In fever (Kapha Pittaj), it is taken in prescribed dosage twice a day after a meal along with Mahasudarshan Vati (250- 500 mg) and Sanjivanai Vati (250- 500 mg).
  • In malabsorption syndrome like IBS, Chitrakadi Vati (250-500 mg), Panchamrita Parpati (125 mg) and Sanjivani Vati (250mg) are advised along with Kutajarishta (15ml+ 15ml water) twice a day after a meal.
  • In diarrhoea with bleeding, it is taken in addition to Bolbaddha Ras (250mg) twice a day. Kamdudha Ras (125mg) may also be added.
  • In digestive impairment, Chitrakadi Vati (250mg), Shankha Vati (250mg) is taken along with Kutajarishta twice a day.

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. It should be taken with precaution in persons with hyperacidity.
  2. Not recommended in ulcers and diabetes.
  3. It should be taken with precaution under Ayurvedic physician's supervision during pregnancy.

 

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Karpurasava

Karpurasava (also spelt as Karpurasavam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is beneficial for diarrhoea, dysentery, gastroenteritis with piercing pain, ascites etc. It is termed due to its active ingredient Karpura.

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Karpurasava

  1. Prasanna (distilled alcohol from fermented solution) 4.800 L
  2. Udupati (Karpura) 384 g
  3. Ela (Sukshmaila) 48 g
  4. Ghana (Musta)48 g
  5. Shringavera (Shunthi) 48 g
  6. Yamanika (Yavani) 48 g
  7. Vellaja (Maricha) 48 g

(Reference: Bhaishajya Ratnavali,  Agnimandyadi rogadhikara: 296-297)

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Karpurasava

5 to 10 drops mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Atisara (Diarrhoea)
  2. Visuchika (Gastroenteritis with piercing pain)
  3. Udararoga (Ascites)
  4. Kaphavikara (Disorders due to vitiation of Kapha dosha)

Therapeutic Uses

  • In diarrhoea, it is taken in prescribed dose 3 to 4 times a day or SOS. Also, Kutaj Ghan Vati (250-500mg) and Sanjivani Vati (250mg) is used twice a day.
  • In gastroenteritis with piercing pain, Panchamrit Parpati (125mg), Giloy Sat (125mg) and Shankh Bhasma (125mg) are taken twice a day before a meal. And, Karpurasava is used in prescribed dose.
  • In ascites, it is taken twice a day along with Punarnavadi Mandur (250-500mg), Arogyavardhini Vati (250mg) and Jalodarari Ras (250mg).
  • In disorders due to vitiation of Kapha dosha, it is taken along with Trikatu Churna or Sitopladi Churna (2-5gm) and Prawal Pishti (125mg) twice daily.

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. It should be taken with precaution in persons with hyperacidity.
  2. Not recommended in ulcers and diabetes.
  3. It should be taken with precaution under Ayurvedic physician's supervision during pregnancy.

 

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Kanakasava

Kanakasava (also spelt as Kanakasavam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is beneficial for various types of respiratory illness like a cough, dyspnoea, asthma, pulmonary tuberculosis and debility due to chest injury. 

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Kanakasava

  1. Kanaka (Dhattura) 192 g
  2. Vrishamula tvak (Vasa) 192 g
  3. Madhuka (Yashti) 96 g
  4. Magadhi (Pippali) 96 g
  5. Vyaghri (Kantakari) 96 g
  6. Keshara (Nagakeshara) 96 g
  7. Vishvabheshaja (Shunthi) 96 g
  8. Bharangi 96 g
  9. Talishapatra (Talisa) 96 g
  10. Dhataki 768 g
  11. Draksha 960 g
  12. Water 24.576 L
  13. Sharkara 4.800 kg
  14. Kshaudra (Madhu) 2.400 kg

(Reference: Bhaishajya Ratnavali, Hikka Shvasadhikara: 98-102)

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Kanakasava

12 to 24 ml mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Kasa (Cough)
  2. Shvasa (Dyspnoea/Asthma)
  3. Rajayakshma (Tuberculosis)
  4. Kshata Kshina (Debility due to chest injury)

Therapeutic Uses

  • In a cough, it is taken twice a day after a meal in prescribed dose. Also, Eladi Vati (250mg) in a dry cough or Lavangadi Vati (250mg) or Vyoshadi Vati (250mg) in a cough with expectoration is to be sucked 3-4 times a day. Nayopayam Kashayam (15ml+ 60ml water) may also be taken along with above medicines.
  • In dyspnoea and asthma, Shwas Kuthar Rasa (250mg), Talisadi Churna (3-5gm) or Sitopladi Churna (3-5gm if wet cough), Abhrak Bhasma (75mg), Prawal Pishti (125mg) are mixed together and taken twice a day 1 hour before breakfast and dinner with honey or Tulasi leaves juice. Kanakasava is taken along with these medicines twice a day after a meal.
  • In pulmonary tuberculosis, Kanakasava should be taken in prescribed dose mixed with Dashmoolajeerakarishta (15ml) and 30ml water. Also, Chyavanprasha (5-10gm) and Sitopladi Churna (3-5gm) are recommended.
  • In debility due to the chest injury, Lakshadi Guggul (250-500mg), Sitopladi Churna (3-5gm) and Prawal Pishti (125mg) are taken twice a day 1 hour before breakfast and dinner. And Kanakasava is taken in prescribed dose twice daily after a meal.

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. May cause throat irritation, gastric discomfort and sedation if taken in a higher dose.
  2. It should be taken with precaution in persons with hyperacidity.
  3. Not recommended in ulcers and diabetes.
  4. Not safe during pregnancy.
  5. It contains Dhatura (thorn apple), hence should be taken under Ayurvedic physician's supervision only.

 

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Ushirasava

Ushirasava (also spelt as Ushirasavam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is commonly recommended for general weakness, as a muscular and nervine tonic, useful in various neurological problems, mania, psychosis, epilepsy and digestive impairment.

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Ushirasava

  1. Ushira 48 g
  2. Balaka (Hrivera) 48 g
  3. Padma 48 g
  4. Kashmarya (Gambhari) 48 g
  5. Nilotpala (Utpala)  48 g
  6. Priyangu 48 g
  7. Padmaka 48 g
  8. Lodhra 48 g
  9. Manjishtha 48 g
  10. Dhanvayasa 48 g
  11. Patha 48 g
  12. Kiratatikta 48 g
  13. Nyagrodha 48 g
  14. Udumbara 48 g
  15. Shati 48 g
  16. Parpata 48 g
  17. Pundarika (Kamala) 48 g
  18. Patola 48 g
  19. Kanchanaraka (Kanchanara) 48 g
  20. Jambu 48 g
  21. Shalmali niryasa (Shalmali) 48 g
  22. Draksha 960 g
  23. Dhataki 768 g
  24. Water 24.576 L
  25. Sharkara 4.800 kg
  26. Kshaudra (Madhu) 2.400 kg
  27. Mansi (Jatamansi) Q.S. for dhupana
  28. Maricha Q.S. for dhupana

(Reference: Bhaishajyaratnavali, Raktapittadhikara: 137-141)

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Ushirasava

12 to 24 ml mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Raktapitta (Bleeding disorder)
  2. Pandu (Anaemia)
  3. Kushtha (Diseases of skin)
  4. Prameha (Urinary disorders)
  5. Arsha (Haemorrhoids)
  6. Krimi (Helminthiasis/ Worm infestation)
  7. Shotha (Inflammation)

Therapeutic Uses

  • In bleeding disorder, it is highly recommended in prescribed dose. Bolbaddha Rasa (125-250mg) and Punarnavadi Mandur (250-500mg) is also advised twice a day before or after a meal.
  • In anaemia, Ushirasava (15ml) and Lohasava (15ml) mixed with 30ml of water is taken twice a day after a meal. Also, Punarnavadi Vati or Dhatri Loh (250-500mg) is added.
  • In diseases of the skin, Ushirasava is taken along with Kaishore Gugulu (500mg) and Gandhak Rasayan (125-250mg) twice a day after meal. Mahamanjishtharishta (15ml) may also be mixed with Ushirasava if needed.
  • In urinary disorders, it is taken with Chandraprabha Vati (500mg) and Gokshuradi Gugul (500mg) twice a day after a meal.
  • In haemorrhoids or bleeding piles, Arshakuthar Ras (250mg), Bolbaddha Ras (125-250mg) and Triphala Guggul (500mg) are taken with Ushirasava twice a day after a meal.
  • In helminthiasis or worm infestation, Krimikuthar Ras (125-250mg) and Arogya Vardhini Vati (250mg) is taken along with Ushirasava (15ml) mixed with Vidangasava (15ml) and 30ml water twice a day after a meal.
  • In inflammation, Ushirasava is taken in prescribed dose twice a day after a meal. Also, Yograj Guggul (500mg) and Punarnavadi Vati (250mg) are taken twice a day. In the inflamed area, Dashanga Lepa or Jatamayadi Lepa is applied as recommended.

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. No side effects reported.
  2. It should be taken with precaution in persons with hyperacidity.
  3. Not recommended in ulcers and diabetes.
  4. It should be taken with precaution during pregnancy.

 

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Ahiphenasava

Ahiphenasava (also spelt as Ahiphenasavam) is an Ayurvedic medicine available in liquid form. It is used in severe diarrhoea, dysentery, gastroenteritis and other life-threatening conditions. This medicine contains purified and processed poisonous ingredients. It is highly recommended to take Ayurvedic physician's advice before it's consumption.

Read Asava Arishta & Characteristics and Method of Preparation

Ingredients of Ahiphenasava

  1. Madhuka madya (Madhuka) 4.800 L
  2. Phaniphena (Ahiphena) 192 g
  3. Mustaka (Musta) 48 g
  4. Jatiphala 48 g
  5. Indra Yava (Kutaja) 48 g
  6. Ela (Sukshmaila) 48 g

(Reference: Bhaishajyaratnavali,  Atisaradhikara: 100-101)

The quantity of each ingredient shown here is as per the text. It may be changed accordingly as per your requirement.

Dosage of Ahiphenasava

5 to 10 drops alone or mixed with equal quantity of water twice a day after meal.

Anupana

Water

Indications

  1. Ugra Atisara (Severe Diarrhoea)
  2. Daruna Visuchika (Severe gastroenteritis)
  3. Pravahika (Dysentery)

Therapeutic Uses

  • In severe Diarrhoea, Ahiphenasava is taken in recommended dose two to four times a day. Also, Kutaj Ghan Vati (250-500mg), Shankha Vati (250mg), Bilwadi Churna (5gm) and Gangadhar Churna (2.5gm) is prescribed according to the condition. 
  • In severe gastroenteritis, Ahiphenasava is taken along with Sanjivani Vati (250mg), Kutaj Ghan Vati (250mg) and Leelavilas Ras (250mg) or Kamdudha Rasa (125-250mg) twice a day.
  • In dysentery, it is used with Kutaj Ghan Vati (250-500mg) and Bilwadi Churna (5gm) twice a day.

Side Effects, Pregnancy Safety & Precaution

  1. Ahiphenasava contains Ahiphena (opium) and Dhatura (thorn apple), which are poisonous. Though they are purified and processed for medicinal use, but it should not be taken without Ayurvedic physician's advice.
  2. No side effects reported. May cause sedative effect if taken in high dose.
  3. It should be taken with precaution in persons with hyperacidity.
  4. Not recommended in ulcers and diabetes.
  5. Not safe during pregnancy.

Recommendation: Dysent Capsules- Best Ayurvedic Medicine for Diarrhoea, Dysentery and IBS