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आयुर्वेदीय दर्शन निरूपण BAMS 1st yr, Padarth Vigyan Paper-1, Unit-2

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इस विडियो लेक्चर में निम्नलिखित टॉपिक्स उपलब्ध हैं:

2  आयुर्वेद दर्शन निरूपण

२.१ दर्शन शब्द का अर्थ एवं

     आयुर्वेदीय दर्शन की व्यापकता

२.२ दर्शन का उद्भव

२.३ दर्शन की संख्या एवं श्रेणी विभाजन

२.४. षडदर्शन

२.५ अन्य भारतीय दर्शन

२.६ आयुर्वेद के ऊपर अन्य दर्शनों का प्रभाव

२.७ आयुर्वेदीय स्वतंत्र मौलिक दर्शन

२.१ दर्शन शब्द का अर्थ एवं उसकी व्यापकता

  दर्शन= दृश धातु + ल्युट प्रत्यय

Øदेखने की क्रिया

Øदेखने का यत्न

Øदर्शन क्रिया

-द्रष्टा और दृश्य

-द्रष्टा कभी भी देखा नहीं जाता (बिना किसी उपकरण की मदद से)

– वेदान्त और सांख्य ने चैतन्य तत्व को ही द्रष्टा माना है

-दर्शन शब्द का व्यव्हार में आना एवं आयुर्वेदीय दर्शन की व्यापकता :

  • योग के द्वारा अपने आत्मा का दर्शन
  • सभी प्राणी सुख प्राप्ति के उपाय में लगे हुए हैं, ज्ञान अज्ञान की विशेषता के कारण ही सुख्प्राप्ति के मार्ग बदल जाते हैं. दर्शन हमें उपयुक्त मार्ग चुनने में मदद करता है.
  • आयुर्वेद को एक दर्शन भी मन गया है क्यूंकि वो हमें सही मार्ग दिखता है.

२.२ दर्शन का उद्भव

-वेदकाल से ही दर्शन पर चिंतन प्रारम्भ हो गया था, वेदमंत्रों में उपलब्ध

     एकत्ववाद (वेदान्त), द्वैतवाद (सांख्य-योग), त्रेतवाद (वैशेषिक, न्याय, मीमांसा)

– कालांतर में एक-एक विचार के आधार पर एक एक प्रणाली पृथक पृथक दर्शन शास्त्र की रचना हुई

२.3 दर्शन की संख्या एवं श्रेणी विभाजन

       १. भारतीय दर्शन   २. पाश्चात्य दर्शन

२.5 अन्य भारतीय दर्शन

-चार्वाक दर्शन

-जैन दर्शन

-बौद्ध दर्शन

२.6 आयुर्वेद के ऊपर अन्य दर्शनों का प्रभाव

आयुर्वेद:          चिकित्सा विज्ञान + मौलिक दर्शन

-पंचमहाभूत आदि सिद्धांत- मौलिक दर्शन

-षट पदार्थ – वैशेषिक

-4 प्रमाण – न्याय दर्शन

-सम्भाषा परिषद्- न्याय दर्शन सम्मत

-25 तत्त्व पुरुष/ कर्म पुरुष – सांख्य दर्शन

-योग और मोक्ष – योग दर्शन

-मीमांसा – यज्ञानुष्ठान आदि कर्म

२.७ आयुर्वेदीय स्वतंत्र मौलिक दर्शन

आयुर्वेद: – व्यावहारिक एवं सार्वपरिषद् शास्त्र

स्वास्थ्य रक्षा सम्बन्धी नियम

आयुर्वेद के सभी मौलिक सिद्धांत आयुर्वेद की ही देन है

 

Topics covered:

2. Ayurveda Darshana Nirupana
2.1 Philosophical background of fundamentals of Ayurveda.
2.2 Etymological derivation of the word “Darshana”. Classification and general introduction to schools of Indian Philosophy with an emphasis on: Nyaya, Vaisheshika, Sankhya and Yoga.
2.3 Ayurveda as unique and independent school of thought (philosophical individuality of Ayurveda).

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